Gen Z और Millennials का फोकस Crypto पर, क्या करेगी सरकार
Blockchain News

Crypto News India, Gen Z और Millennials का फोकस क्रिप्टो पर, क्या करेगी सरकार

भारत में कभी सिर्फ रिटेल ट्रेडर्स का खेल मानी जाने वाली Crypto अब HNIs, फैमिली ऑफिसेज़ और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के पोर्टफोलियो का हिस्सा बन चुकी है। दूसरी ओर, Morgan Stanley की नई रिपोर्ट ने बेहद ही चौंकाने वाला खुलासा किया है। यह रिपोर्ट साफ़ दिखाती है कि Gen Z और Millennials, इन्वेस्टमेंट सिर्फ मुनाफ़े के लिए नहीं कर रहे, बल्कि वैल्यूज़ और सस्टेनेबिलिटी के लिए भी कर रहे हैं। सवाल यह है कि क्या भारत सरकार इस नई इन्वेस्टमेंट वेव के लिए तैयार है?

Morgan Stanley की रिपोर्ट: युवाओं की सोच क्यों बदली?

Morgan Stanley की “Sustainable Signals - Individual Investors 2025” रिपोर्ट से यह साफ़ हुआ कि ग्लोबली 88% निवेशक सस्टेनेबल इन्वेस्टमेंट्स में रुचि रखते हैं। लेकिन असली कहानी युवा निवेशकों की है। Gen Z के 99% और Millennials के 97% निवेशक सस्टेनेबिलिटी-फोकस्ड इन्वेस्टमेंट्स में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इनमें से लगभग 70% ने खुद को “बहुत ज्यादा इंटरेस्टेड” बताया। यही नहीं, Gen Z के 68% और Millennials के 65% ने पहले ही अपने पोर्टफोलियो का 20% से ज्यादा हिस्सा उन कंपनियों और फंड्स में निवेश कर दिया है जो सामाजिक या पर्यावरणीय असर डाल रहे हैं।

युवा निवेशकों के लिए अब सिर्फ यह मायने नहीं रखता कि कितना मुनाफ़ा होगा, बल्कि यह भी कि पैसा कहाँ और क्यों लगाया जा रहा है। यही वजह है कि 85% निवेशकों को अब विश्वास है कि सस्टेनेबिलिटी और प्रॉफिट्स साथ-साथ चल सकते हैं।

भारत में HNIs और फैमिली ऑफिसेज़ का रुख क्यों बदला?

भारत में Crypto Market का चेहरा बदलने में बड़ी भूमिका अब HNIs और फैमिली ऑफिसेज़ निभा रहे हैं। CoinDCX के मुताबिक, उसके कुल ट्रेडिंग वॉल्यूम का लगभग 50% सिर्फ 3,500 HNIs और इंस्टीट्यूशनल क्लाइंट्स से आ रहा है। वहीं CoinSwitch के VP अतुल अहलूवालिया का कहना है कि अब बहस इस पर नहीं हो रही कि Bitcoin लीगल है या नहीं, बल्कि इस पर हो रही है कि कितनी अलोकेशन करनी चाहिए, कौन-से टोकन लॉन्ग टर्म के लिए बेहतर हैं और किस तरह की कस्टडी अपनाई जाए। यह साफ़ दिखाता है कि अब रिटेल ट्रेडर्स नहीं, बल्कि बड़े निवेशक इस गेम को लीड कर रहे हैं।

Crypto पर भारत सरकार का वर्तमान रुख क्या है?

Crypto पर भारत सरकार का नजरिया भी धीरे-धीरे बदल रहा है। संसद की गृह मामलों की समिति ने हाल ही में साफ़ कहा है कि Crypto को बैन करने की बजाय इसे FEMA के तहत डिजिटल एसेट का दर्जा दिया जाना चाहिए। हालाँकि, 2019 से 2024 के बीच ₹31,594 करोड़ के फ्रॉड और लाखों शिकायतें सामने आईं, लेकिन समिति का मानना है कि इसका हल बैन नहीं बल्कि रेगुलेशन है। इसी बीच 15 अगस्त 2025 को भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस पर Bitcoin Policy Institute of India (BPI India) लॉन्च हुआ, जिसका उद्देश्य Bitcoin को स्ट्रैटेजिक एसेट मानकर नीति निर्माण में शामिल करना है। यह संकेत देता है कि सरकार अब इस पर गंभीरता से काम कर रही है।  

Crypto - Parliamentary Standing Committee on Finance

Source - यह इमेज Parliamentary Standing Committee on Finance के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन से ली गई है।

ब्लॉकचेन अब भारत की डिजिटल स्ट्रेटजी का हिस्सा

भारत अब केवल Crypto पर नहीं बल्कि ब्लॉकचेन पर भी बड़ा दांव लगा रहा है। Indian National Blockchain Framework के तहत लैंड रिकॉर्ड्स, सप्लाई चेन और डिजिटल कॉमर्स सेक्टर को ब्लॉकचेन से जोड़ा जा रहा है। Ministry of Electronics and IT इसकी पुष्टि पहले ही कर चुकी है। यह कदम भारत को उन देशों की लिस्ट में शामिल करता है जो ब्लॉकचेन को सिर्फ एक टेक्नोलॉजी नहीं बल्कि डिजिटल गवर्नेंस का मेन पार्ट मान रहे हैं।

स्पेक्युलेटिव गेम नहीं बल्कि एक स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टमेंट है Crypto

मैं पिछले 13 सालों से लिख रहा हूँ और पिछले 3 सालों से क्रिप्टो मार्केट को करीब से देख रहा हूँ। मेरे अनुभव में Crypto अब केवल एक स्पेक्युलेटिव गेम नहीं बल्कि एक स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टमेंट बन चुका है। लेकिन इसमें सबसे बड़ा रिस्क रेगुलेशन का है। अगर सरकार ने जल्द और स्पष्ट फ्रेंडली रेगुलेशन नहीं बनाया, तो भारतीय निवेशक मजबूर होकर ऑफशोर प्लेटफ़ॉर्म्स का सहारा ले सकते हैं। यह समय भारत के लिए गोल्डन चांस है। अगर सरकार ने सही नीतियाँ बनाईं, तो युवा निवेशकों की ऊर्जा और HNIs का भरोसा मिलकर भारत को ग्लोबल लेवल पर क्रिप्टो हब बना सकता है।

कन्क्लूजन 

Crypto और सस्टेनेबल इन्वेस्टमेंट्स अब फैशन नहीं बल्कि भविष्य हैं। आज जो ट्रेंड दिख रहा है, वह यह कि क्रिप्टो और डिजिटल असेट्स को कौन लीड कर रहा है Gen Z, Millennials या HNIs। क्रिप्टो अब शौक नहीं बल्कि पोर्टफोलियो का स्ट्रैटेजिक हिस्सा है। इसमें रिटर्न्स और वैल्यूज़ दोनों का मेल है। भारत का डिजिटल फोकस अब गवर्नेंस से लेकर फाइनेंस तक हर जगह ब्लॉकचेन पर टिक चुका है।

अगर सरकार ने समय रहते सही रेगुलेशन और ट्रांसपेरेंसी दी, तो भारत दुनिया का अगला क्रिप्टो हब बन सकता है।

Rohit Tripathi

रोहित त्रिपाठी एक सीनियर क्रिप्टो कंटेंट राइटर और ब्लॉकचेन रिसर्चर हैं, जिनके पास टेक्नोलॉजी और डिजिटल मीडिया में 13+ वर्षों का अनुभव है। बीते कुछ वर्षों से वह विशेष रूप से क्रिप्टोकरेंसी, ऑन-चेन एनालिटिक्स, DeFi इकोसिस्टम और टोकनॉमिक्स जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित हैं। रोहित की विशेषज्ञता SEO-अनुकूल, डेटा-ड्रिवन कंटेंट और इंडस्ट्री-केंद्रित रिसर्च लेख तैयार करने में है।

वह वर्तमान में Crypto Hindi News में टीम लीड और हेड ऑफ कंटेंट के रूप में कार्यरत हैं। उनकी लेखनी में एक्यूरेसी, ट्रांसपेरेंसी और रीडर्स को वैल्यू देना सर्वोपरि है। वे ऑन-चेन टूल्स और विश्वसनीय मार्केट डेटा का प्रयोग करते हुए प्रत्येक लेख को फैक्ट-आधारित बनाते हैं। हिंदी भाषी रीडर्स के लिए उनका मिशन है: “हाई-क्वालिटी, फैक्चुअल और यूज़र-फर्स्ट क्रिप्टो कंटेंट उपलब्ध कराना।”

LinkedIn पर प्रोफ़ाइल देखें | रोहित के लेख पढ़ें-

LEAVE A REPLY
Please enter your comment!
Please enter your name here

और ब्लॉकचेन खबरें
Sticky Banner